दिल्ली के मंदिर
3 मंदिर*
यह सूची अभी पूर्ण नहीं है — शोध पूरा होते ही इस राज्य के और महान मंदिर यहाँ जुड़ते जाएँगे।
नई दिल्ली की चौड़ी सड़कों के नीचे सबसे पुरानी दिल्ली साँस लेती है, और उस पुरानी दिल्ली की रक्षिका देवी हैं। महरौली में, कुतुब परिसर के पास, योगमाया विराजती हैं — श्रीकृष्ण की बहन, वह दिव्य कन्या जिस पर कंस ने हाथ उठाया और जो उसके हाथ से छूटकर आकाश में प्रकट हुईं और उसके विनाश की घोषणा कर अंतर्धान हो गईं। परंपरा उनके मंदिर को इंद्रप्रस्थ के पांडवों तक ले जाती है, और यह राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के प्राचीनतम जीवित देवालयों में गिना जाता है। वर्षा बीतने पर यहीं फूलवालों की सैर आती है — वह शोभायात्रा जो फूलों के पंखे योगमाया को और पास ही कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी की दरगाह को अर्पित करती है — हिंदू और मुसलमान साथ चलते हैं, नगर के सबसे कोमल उत्सवों में से एक में।
दक्षिण में, प्राचीन अरावली की एक चट्टानी पहाड़ी पर, कालिका कालकाजी में विराजती हैं — उनकी पिंडी स्वयंभू मानी जाती है, और परंपरा कहती है कि असुरों के दमन के लिए देवी यहीं प्रकट हुईं; वर्तमान संरचना के प्राचीनतम अंश अठारहवीं शताब्दी के हैं, और पहाड़ी से मंदिर आज के आधुनिक नगर के सम्मुख खड़ा है — नेहरू प्लेस की मीनारें और कमल मंदिर दृष्टि-भर दूरी पर। नगर के हृदय में, करोल बाग के पास, झंडेवालान देवी हैं — भक्त बद्री दास को स्वप्न में दिखा और खुदाई में मिला माँ का विग्रह; मनौती पूरी होने पर भक्त जो झंडे चढ़ाते गए, उन्हीं झंडों से मंदिर और मोहल्ले दोनों का नाम पड़ा, और मूल विग्रह आज भी नीचे गुफा-गर्भगृह में विराजमान है, ऊपर सिंहासन पर विराजी देवी। नवरात्र इस नगर की जीवित ऋतु है — चैत्र और आश्विन, दोनों की नौ रातें देवी-धाम भक्तों से उमड़े रहते हैं, और दर्शन भोर से पहले आरंभ हो जाते हैं। व्यावहारिक सूत्र मेट्रो है: कालकाजी मंदिर स्टेशन वायलेट और मजेंटा लाइनों का इंटरचेंज है, मंदिर के पास ही; झंडेवालान स्टेशन ब्लू लाइन पर देवी के द्वार से थोड़ी ही दूर; और येलो लाइन के कुतुब मीनार स्टेशन से महरौली की गलियों में कुछ पैदल दूरी पर योगमाया।

कालकाजी मंदिर
कालकाजी, नई दिल्ली, दिल्ली
अरावली की पहाड़ी की कालिका — सूर्यकूट पर विराजमान वह स्वयंभू पिंडी, जिसके समक्ष दिल्ली ने नगर के हर युग में अपनी मनोकामना रखी है।
झण्डेवाली देवी
झण्डेवालान, नई दिल्ली, दिल्ली
दिल्ली की अरावली-शिला पर विराजने वाली ध्वजों की देवी — जिनका विग्रह एक भक्त के स्वप्न से भूमि के नीचे से प्रकट हुआ, और जो आज भी नीचे गुफा में पूजी जाती हैं, जबकि ऊपर भवन-दरबार में माता सिंहासनारूढ़ हैं।
योगमाया, मेहरौली
मेहरौली, नई दिल्ली, दिल्ली
मेहरौली की योगमाया — श्रीकृष्ण की वही बहन, जो कंस के हाथ से छूटकर आकाश में उठीं और उसका विनाश उद्घोषित किया — कुतुब के पार्श्व में, अपने चारों ओर बसती और उजड़ती हर दिल्ली को देखती हुई आज भी पूजित हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
MereMandir पर दिल्ली के कितने प्रमुख मंदिर सूचीबद्ध हैं?+
तीन — नगर के दक्षिण में अरावली की पहाड़ी पर कालकाजी, हृदय में करोल बाग के पास झंडेवालान, और कुतुब परिसर के पास महरौली में योगमाया। तीनों देवी के धाम हैं — राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की उपासना की सबसे पुरानी जीवित धारा: कालिका, जिनकी पिंडी स्वयंभू मानी जाती है; झंडों वाली माता, जिनका विग्रह एक भक्त के स्वप्न से मिला; और योगमाया — श्रीकृष्ण की बहन — जिनके मंदिर की परंपरा इंद्रप्रस्थ तक जाती है।
दिल्ली के देवी मंदिर कितने प्राचीन हैं?+
इनकी प्राचीनता परंपरा की थाती है, और परंपरा के रूप में ही कही जाती है। योगमाया का मंदिर परंपरा में इंद्रप्रस्थ के पांडवों तक जाता है और दिल्ली के प्राचीनतम जीवित देवालयों में गिना जाता है; कालकाजी की पिंडी स्वयंभू पूजित है और उनकी महिमा युगों पीछे तक मानी जाती है, यद्यपि वर्तमान संरचना के प्राचीनतम अंश अठारहवीं शताब्दी के हैं; झंडेवालान सबसे नया धाम है — भक्त बद्री दास के स्वप्न से मिला माँ का भूमिगत विग्रह; मनौती पूरी होने पर चढ़ाए गए झंडों ने मंदिर और मोहल्ले को नाम दिया, और मूल विग्रह आज भी सिंहासनासीन देवी के नीचे गुफा-गर्भगृह में विराजमान है।
क्या दिल्ली के देवी मंदिरों के दर्शन एक ही दिन में हो सकते हैं?+
बड़ी सुगमता से — और सूत्र मेट्रो है। कालकाजी मंदिर स्टेशन वायलेट और मजेंटा लाइनों का इंटरचेंज है, मंदिर के पास ही; झंडेवालान स्टेशन ब्लू लाइन पर देवी के द्वार से थोड़ी ही दूर है; और येलो लाइन के कुतुब मीनार स्टेशन से कुतुब परिसर लगभग 1.2 किलोमीटर है, और उससे कुछ सौ मीटर आगे महरौली की गलियों में योगमाया हैं। एक सहज दिन में दर्शन हो जाते हैं — यद्यपि नवरात्र में पंक्तियाँ घंटों लंबी होती हैं, और प्रतीक्षा के बाद दर्शन और भी मधुर लगता है।
दिल्ली के मंदिर दर्शन का सर्वोत्तम समय क्या है?+
अक्टूबर से मार्च, जब नगर का मौसम सुहावना रहता है। चैत्र और आश्विन के दोनों नवरात्र दिल्ली की जीवित ऋतु हैं — नौ रातें कालकाजी और झंडेवालान भक्तों से उमड़े रहते हैं और दर्शन भोर से पहले आरंभ हो जाते हैं। वर्षा बीतने पर महरौली में फूलवालों की सैर निकलती है — फूलों के पंखे योगमाया को और पास की कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी की दरगाह को अर्पित होते हैं। ग्रीष्म में पहाड़ी तपती है, तब प्रातःकालीन दर्शन उत्तम रहता है।
