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चार धाम4 पड़ाव

चार धाम यात्रा

इस परंपरा के बारे में जानें

चार धाम का अर्थ है भगवान के चार पावन निवास, जो भारत की चार दिशाओं में स्थित हैं — उत्तर में हिमालय की गोद में बसा बद्रीनाथ (उत्तराखंड), पूर्व में समुद्र-तट पर जगन्नाथ पुरी (ओडिशा), दक्षिण में रामेश्वरम (तमिलनाडु) और पश्चिम में द्वारका (गुजरात)। मान्यता है कि आठवीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य ने इन चारों धामों की यात्रा की परंपरा स्थापित की, ताकि सम्पूर्ण भारतवर्ष एक पवित्र सूत्र में बँध जाए और यात्री चारों दिशाओं की परिक्रमा करते हुए पूरे भारत के दर्शन कर सके। ध्यान रहे, यह अखिल भारतीय चार धाम उत्तराखंड के ‘छोटा चार धाम’ (यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ) से भिन्न है — दोनों में केवल बद्रीनाथ ही साझा है। इन धामों में बद्रीनाथ में भगवान बद्रीनारायण, पुरी में भगवान जगन्नाथ, द्वारका में द्वारकाधीश श्रीकृष्ण और रामेश्वरम में रामनाथस्वामी ज्योतिर्लिंग के रूप में भगवान शिव विराजमान हैं।

परंपरा के अनुसार यह यात्रा घड़ी की दिशा में, अर्थात् भारत की परिक्रमा के रूप में की जाती है — पहले उत्तर में बद्रीनाथ, फिर पूर्व में पुरी, फिर दक्षिण में रामेश्वरम और अंत में पश्चिम में द्वारका। योजना बनाते समय यथार्थ का ध्यान रखें: चारों धाम देश के चार कोनों पर हैं और पूरी यात्रा में लगभग 6,000 किलोमीटर या उससे अधिक की दूरी तय करनी पड़ती है। इसीलिए अधिकांश श्रद्धालु एक बार में एक ही धाम की यात्रा करते हैं और वर्षों में चारों धाम पूर्ण करते हैं। यदि आप सड़क और रेल से एक ही यात्रा में पूरा परिक्रमा-पथ पूर्ण करना चाहें, तो दो से तीन सप्ताह का समय अवश्य रखें। बद्रीनाथ का समय-चक्र पूरी योजना तय करता है — यह मंदिर केवल ग्रीष्म-काल में, लगभग मई से नवंबर की शुरुआत तक खुलता है और शेष वर्ष बर्फ़ से ढका रहता है।

हर धाम का अपना उत्तम मौसम है। बद्रीनाथ की यात्रा ग्रीष्म-काल में ही संभव है; मंदिर 3,000 मीटर से अधिक ऊँचाई पर है, इसलिए गर्मियों में भी ऊनी वस्त्र साथ रखें। पुरी में वर्ष-भर दर्शन होते हैं, पर जून-जुलाई की रथ यात्रा में अपार भीड़ उमड़ती है और ठहरने की व्यवस्था पहले से करनी पड़ती है। रामेश्वरम के लिए अक्टूबर से अप्रैल का समय सबसे अनुकूल है, और द्वारका के लिए अक्टूबर से मार्च — जन्माष्टमी पर वहाँ सर्वाधिक भीड़ रहती है। कुछ व्यावहारिक बातें यात्रा को सरल बनाती हैं: रेल टिकट और आवास पहले से आरक्षित करें, पहचान-पत्र साथ रखें, हिमालयी मार्ग के लिए अतिरिक्त दिन रखें और बुज़ुर्ग यात्री बद्रीनाथ की ऊँचाई पर जाने से पहले चिकित्सकीय परामर्श अवश्य लें। धैर्यपूर्वक, एक-एक दिशा करके, उचित ऋतु में की गई यह यात्रा जीवन-भर की साधना बनकर पूर्ण होती है।

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दर्शन-क्रम में यात्रा मार्ग

  1. 1
    Badrinath Temple, Chamoli

    बद्रीनाथ

    चमोली, उत्तराखंड

    उच्च हिमालय में बद्रीनारायण के रूप में विष्णु — चार धाम का उत्तरी धाम, नर और नारायण पर्वतों के बीच अलकनंदा के तट पर स्थित।

  2. 2~1372 किमी हवाई दूरी
    Jagannath Puri Temple

    जगन्नाथ पुरी

    पुरी, ओडिशा

    पुरी के भगवान जगन्नाथ — चार धाम का पूर्वी धाम, संसार की सबसे भव्य रथयात्रा के लिए विख्यात।

  3. 3~1362 किमी हवाई दूरी
    Ramanathaswamy Temple, Rameswaram

    रामनाथस्वामी (रामेश्वरम्)

    रामेश्वरम्, तमिलनाडु

    जहाँ राम ने लंका पार करने से पूर्व शिव की आराधना की — एक ज्योतिर्लिंग और चार धाम, भारत के सबसे लंबे मंदिर-गलियारे के साथ।

  4. 4~1815 किमी हवाई दूरी
    The Jagat Mandir at Dwarka — the tall carved shikhara of Dwarkadhish under its dhwaja, subsidiary spires and saffron flags along the compound wall

    द्वारकाधीश

    द्वारका, गुजरात

    कृष्ण की प्रसिद्ध सागर-नगरी द्वारका — चार धाम का पश्चिमी धाम, गोमती के ऊपर पाँच मंज़िलों में उठता हुआ।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चार धाम यात्रा में कितने दिन लगते हैं?

कोई निश्चित नियम नहीं है। सड़क और रेल से चारों धामों की लगातार यात्रा में सामान्यतः दो से तीन सप्ताह लगते हैं, क्योंकि पूरा मार्ग लगभग 6,000 किलोमीटर या उससे अधिक का है। अधिकांश श्रद्धालु एक यात्रा में एक ही धाम जाते हैं — यात्रा सहित प्रायः तीन से पाँच दिन — और वर्षों में चारों धाम पूर्ण करते हैं। बद्रीनाथ के लिए मौसम को देखते हुए अतिरिक्त दिन अवश्य रखें।

चार धाम यात्रा का सही क्रम क्या है?

परंपरागत रूप से यह यात्रा घड़ी की दिशा में, भारत की परिक्रमा की तरह की जाती है — पहले बद्रीनाथ (उत्तर), फिर पुरी (पूर्व), फिर रामेश्वरम (दक्षिण) और अंत में द्वारका (पश्चिम)। फिर भी शास्त्रों में कोई एक अनिवार्य क्रम नहीं बताया गया है; अनेक श्रद्धालु अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी क्रम में दर्शन करते हैं। मुख्य बात श्रद्धापूर्वक चारों धाम पूर्ण करना है।

क्या यह उत्तराखंड वाले चार धाम के समान है?

नहीं। अखिल भारतीय चार धाम में बद्रीनाथ, पुरी, रामेश्वरम और द्वारका आते हैं, जो देश की चार दिशाओं में फैले हैं। उत्तराखंड का परिपथ — यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ — ‘छोटा चार धाम’ कहलाता है और पूरी तरह गढ़वाल हिमालय में स्थित है। दोनों में केवल बद्रीनाथ साझा है। यह मार्गदर्शिका आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित अखिल भारतीय चार धाम के लिए है।

बद्रीनाथ कब खुलता है?

बद्रीनाथ मंदिर केवल ग्रीष्म-ऋतु में खुलता है — सामान्यतः अप्रैल के अंत या मई की शुरुआत से अक्टूबर-नवंबर तक। कपाट खुलने और बंद होने की तिथियाँ हर वर्ष हिंदू पंचांग के अनुसार घोषित की जाती हैं। शीतकाल में मंदिर भारी बर्फ़ के कारण बंद रहता है और भगवान की शीतकालीन पूजा जोशीमठ क्षेत्र में होती है। यात्रा से पहले उस वर्ष की तिथियाँ अवश्य जाँच लें।

क्या चार धाम यात्रा रेल से की जा सकती है?

काफ़ी हद तक हाँ। पुरी, रामेश्वरम और द्वारका — तीनों में रेलवे स्टेशन हैं और प्रमुख शहरों से सीधी ट्रेनें मिलती हैं। बद्रीनाथ तक रेल नहीं जाती — हरिद्वार या ऋषिकेश तक ट्रेन से जाकर लगभग 300 किलोमीटर की सड़क यात्रा करनी होती है। समय-समय पर आईआरसीटीसी चार धाम परिपथ के लिए विशेष पर्यटक ट्रेनें भी चलाता है; बुकिंग से पहले वर्तमान कार्यक्रम देख लें।