गणेश चतुर्थी भगवान श्री गणेश के जन्मोत्सव का पावन पर्व है। शिव-पार्वती के पुत्र, विघ्नहर्ता गणपति समस्त शुभ कार्यों के आरंभ में सबसे पहले पूजे जाते हैं — वे बुद्धि, ऋद्धि-सिद्धि और मंगल के देवता हैं। यह पर्व भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है; वर्ष 2026 में यह तिथि सोमवार, 14 सितम्बर को है। भक्तों के लिए यह केवल एक तिथि नहीं, बल्कि बप्पा के घर पधारने का उत्सव है — इन दिनों गणपति परिवार के सबसे प्रिय अतिथि बनकर विराजते हैं।
उत्सव का आरंभ स्थापना से होता है। “गणपति बप्पा मोरया” के जयघोष के साथ मिट्टी की मूर्ति घर लाई जाती है, सजे हुए आसन पर प्राणप्रतिष्ठा होती है, और फिर मोदक, दूर्वा और पुष्प अर्पित कर प्रातः-सायं आरती की जाती है। घर-घर की पूजा के साथ सार्वजनिक गणेशोत्सव की परंपरा भी चलती है — लोकमान्य तिलक ने 1893 में जन-जागरण और एकता के लिए इसे सार्वजनिक रूप दिया, और तब से मोहल्लों के भव्य पंडाल भक्ति, संगीत और कला के केंद्र बन गए हैं। कोई डेढ़ दिन, कोई तीन, पाँच या सात दिन बाद विसर्जन करता है, पर सबसे भव्य विदाई अनंत चतुर्दशी को होती है — 2026 में शुक्रवार, 25 सितम्बर को — जब “गणपति बप्पा मोरया, पुढच्या वर्षी लवकर या” के उद्घोष के साथ शोभायात्राएँ बप्पा को नदी, सरोवर और सागर में विसर्जित करती हैं।
महाराष्ट्र में इस उत्सव की छटा अद्वितीय है। मुंबई के लालबागचा राजा के दर्शन हेतु रात-रात भर कतारें लगती हैं, पुणे के श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई और कसबा गणपति पूरे नगर की श्रद्धा के केंद्र बनते हैं। महाराष्ट्र ही अष्टविनायक की पुण्यभूमि है — पुणे के चारों ओर स्थित आठ प्राचीन मंदिर: मोरगाँव, थेऊर, सिद्धटेक, रांजणगाँव, ओझर, लेण्याद्री, महड और पाली, जहाँ गणेश जी स्वयंभू रूप में विराजमान हैं। परंपरा के अनुसार यह यात्रा मोरगाँव के मयूरेश्वर से आरंभ होकर वहीं पूर्ण होती है, और गणेशोत्सव के दिनों में इस यात्रा का विशेष पुण्य माना जाता है — इसी कारण अनगिनत श्रद्धालु अपनी अष्टविनायक यात्रा इसी काल में करते हैं।
दर्शन कहाँ करें
मयूरेश्वर, मोरगाव
मोरगाँव, पुणे, महाराष्ट्र
अष्टविनायक यात्रा का प्रथम और अंतिम नमन — जहाँ गणेश ने अपने मयूर पर सवार होकर कर्हा नदी के तट पर मोरगाँव में सिंधु राक्षस का वध किया।
सिद्धिविनायक, सिद्धटेक
सिद्धटेक, अहिल्यानगर, महाराष्ट्र
आठों में एकमात्र दक्षिण-सूँड़ वाले गणेश — भीमा नदी के ऊपर एक पहाड़ी पर विराजमान सिद्धिविनायक, सिद्धि अर्थात् उपलब्धि के दाता।
बल्लाळेश्वर, पाली
पाली, रायगढ़, महाराष्ट्र
एकमात्र अष्टविनायक जो किसी भक्त के नाम पर है — बालक बल्लाल के नाम पर — सरसगढ़ दुर्ग और अंबा नदी के बीच स्थित, जिसका प्रसाद बेसन का लड्डू है।

वरदविनायक, महड
महड, रायगढ़, महाराष्ट्र
आठों में वरदाता — महड ग्राम के वरदविनायक, जहाँ कहा जाता है कि 1892 से एक नंददीप दीपक जलता आ रहा है।
चिंतामणि, थेऊर
थेऊर, पुणे, महाराष्ट्र
वह गणेश जो अशांत मन को शांति देते हैं — पाँचवें अष्टविनायक, थेऊर की नदी-संगम पर विराजमान और पेशवाओं का अत्यंत प्रिय तीर्थ।

गिरिजात्मज, लेण्याद्री
लेण्याद्री, पुणे, महाराष्ट्र
आठों में एकमात्र पर्वत-एवं-गुफा वाले गणेश — गिरिजा के पुत्र, कुकड़ी नदी के ऊपर एक प्राचीन शैलोत्कीर्ण बौद्ध विहार में विराजमान।
विघ्नहर, ओझर
ओझर, पुणे, महाराष्ट्र
कुकड़ी के तट पर विघ्नों को हरने वाले — स्वर्ण-गुंबद वाला ओझर तीर्थ, जहाँ गणेश ने विघ्नासुर दैत्य का दमन किया।
महागणपति, रांजणगाव
रांजणगाँव, पुणे, महाराष्ट्र
आठों में सर्वाधिक बलशाली — रांजणगाँव तीर्थ, जहाँ स्वयं शिव ने त्रिपुरासुर दैत्य का सामना करने से पूर्व गणेश का आवाहन किया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
2026 में गणेश चतुर्थी कब है?+
द्रिक पंचांग एवं अन्य पंचांगों के अनुसार गणेश चतुर्थी सोमवार, 14 सितम्बर 2026 को है, जो भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी की तिथि है। गणपति स्थापना के लिए मध्याह्न मुहूर्त सर्वोत्तम माना जाता है; अपने नगर का स्थानीय पंचांग अवश्य देखें। उत्सव का समापन शुक्रवार, 25 सितम्बर 2026 को विसर्जन के साथ होगा।
यह उत्सव कितने दिनों तक चलता है?+
गणेशोत्सव परंपरागत रूप से दस दिनों का उत्सव है, जो गणेश चतुर्थी से आरंभ होकर अनंत चतुर्दशी के भव्य विसर्जन पर समाप्त होता है — 2026 में 14 सितम्बर से 25 सितम्बर तक। अनेक परिवार अपनी कुल-परंपरा के अनुसार डेढ़ दिन, तीन, पाँच या सात दिन बाद भी गणपति का विसर्जन करते हैं।
सबसे भव्य उत्सव कहाँ मनाया जाता है?+
महाराष्ट्र में गणेशोत्सव की भव्यता अद्वितीय है। मुंबई के विशाल पंडाल — विशेषकर लालबागचा राजा — लाखों भक्तों को आकर्षित करते हैं, और पुणे के श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई तथा कसबा गणपति उस सार्वजनिक परंपरा के केंद्र हैं जिसे लोकमान्य तिलक ने 1893 में आरंभ किया था। गोवा, कर्नाटक, तेलंगाना और विश्व भर के हिन्दू समुदायों में भी यह पर्व श्रद्धा से मनाया जाता है।
अनंत चतुर्दशी क्या है?+
अनंत चतुर्दशी भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि है — 2026 में शुक्रवार, 25 सितम्बर। इस दिन भगवान विष्णु की अनंत रूप में पूजा होती है, और यही गणेशोत्सव का अंतिम दिन भी है, जब सबसे बड़ी विसर्जन शोभायात्राएँ गणेश प्रतिमाओं को नदी, सरोवर और सागर तक ले जाती हैं और अगले वर्ष शीघ्र लौटने की प्रार्थना के साथ बप्पा को विदाई दी जाती है।
दर्शन के लिए सर्वोत्तम मंदिर कौन-से हैं?+
गणेश दर्शन के लिए पुणे के चारों ओर स्थित आठ अष्टविनायक मंदिर सर्वाधिक पूजनीय हैं: मोरगाँव के मयूरेश्वर, थेऊर के चिंतामणि, सिद्धटेक के सिद्धिविनायक, रांजणगाँव के महागणपति, ओझर के विघ्नहर, लेण्याद्री के गिरिजात्मज, महड के वरदविनायक और पाली के बल्लाळेश्वर। प्रत्येक मंदिर में स्वयंभू मूर्ति विराजमान है, और गणेशोत्सव के दिनों में यह यात्रा पूर्ण करना विशेष शुभ माना जाता है।
