🛕मेरे मंदिर

अष्टविनायक

महाराष्ट्र की पहाड़ियों के बीच भगवान गणेश के आठ स्वयं-प्रकट धाम।

8 मंदिर

अष्टविनायक — 'आठ गणेश' — भगवान गणेश के आठ प्राचीन एवं पूजनीय धाम हैं, जो सभी पुणे के आसपास महाराष्ट्र के दक्कन भूभाग में स्थित हैं। प्रत्येक में एक स्वयंभू (स्वयं प्रकट) मूर्ति विराजमान है, जिसका अपना विशिष्ट रूप, कथा और नाम है।

मिलकर ये एक अत्यंत प्रिय तीर्थ-परिक्रमा बनाते हैं। भक्त परंपरागत रूप से मोरगाँव के मयूरेश्वर से आरंभ और समापन करते हुए एक निश्चित क्रम में आठों के दर्शन करते हैं — प्रत्येक मूर्ति सूँड़ के मोड़, मुद्रा और उस कथा में भिन्न है कि गणेश वहाँ किसी असुर के संहार या किसी भक्त के कल्याण हेतु कैसे प्रकट हुए।

आठ हैं — मयूरेश्वर (मोरगाँव), सिद्धिविनायक (सिद्धटेक), बल्लालेश्वर (पाली), वरदविनायक (महड), चिंतामणि (थेऊर), गिरिजात्मज (लेण्याद्रि), विघ्नहर (ओझर) और महागणपति (रांजणगाँव) — महाराष्ट्र की गणेश-भक्ति को पिरोती धामों की एक माला।

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तीर्थ यात्रा क्रम

पारंपरिक यात्रा मयूरेश्वर (मोरगाँव) से आरंभ और समाप्त होती है, इस क्रम में: मयूरेश्वर, सिद्धिविनायक, बल्लालेश्वर, वरदविनायक, चिंतामणि, गिरिजात्मज, विघ्नहर और महागणपति।

अष्टविनायक मंदिर

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Mayureshwar Temple, Morgaon, Pune

मयूरेश्वर, मोरगाव

मोरगाँव, पुणे, महाराष्ट्र

अष्टविनायक यात्रा का प्रथम और अंतिम नमन — जहाँ गणेश ने अपने मयूर पर सवार होकर कर्हा नदी के तट पर मोरगाँव में सिंधु राक्षस का वध किया।

Siddhivinayak Temple, Siddhatek, Ahmednagar

सिद्धिविनायक, सिद्धटेक

सिद्धटेक, अहिल्यानगर, महाराष्ट्र

आठों में एकमात्र दक्षिण-सूँड़ वाले गणेश — भीमा नदी के ऊपर एक पहाड़ी पर विराजमान सिद्धिविनायक, सिद्धि अर्थात् उपलब्धि के दाता।

Ballaleshwar Temple, Pali, Raigad

बल्लाळेश्वर, पाली

पाली, रायगढ़, महाराष्ट्र

एकमात्र अष्टविनायक जो किसी भक्त के नाम पर है — बालक बल्लाल के नाम पर — सरसगढ़ दुर्ग और अंबा नदी के बीच स्थित, जिसका प्रसाद बेसन का लड्डू है।

Varadvinayak Temple, Mahad, Raigad

वरदविनायक, महड

महड, रायगढ़, महाराष्ट्र

आठों में वरदाता — महड ग्राम के वरदविनायक, जहाँ कहा जाता है कि 1892 से एक नंददीप दीपक जलता आ रहा है।

Chintamani Temple, Theur, Pune

चिंतामणि, थेऊर

थेऊर, पुणे, महाराष्ट्र

वह गणेश जो अशांत मन को शांति देते हैं — पाँचवें अष्टविनायक, थेऊर की नदी-संगम पर विराजमान और पेशवाओं का अत्यंत प्रिय तीर्थ।

Girijatmaj Temple, Lenyadri, Pune

गिरिजात्मज, लेण्याद्री

लेण्याद्री, पुणे, महाराष्ट्र

आठों में एकमात्र पर्वत-एवं-गुफा वाले गणेश — गिरिजा के पुत्र, कुकड़ी नदी के ऊपर एक प्राचीन शैलोत्कीर्ण बौद्ध विहार में विराजमान।

Vighnahar Temple, Ozar, Pune

विघ्नहर, ओझर

ओझर, पुणे, महाराष्ट्र

कुकड़ी के तट पर विघ्नों को हरने वाले — स्वर्ण-गुंबद वाला ओझर तीर्थ, जहाँ गणेश ने विघ्नासुर दैत्य का दमन किया।

Mahaganapati Temple, Ranjangaon, Pune

महागणपति, रांजणगाव

रांजणगाँव, पुणे, महाराष्ट्र

आठों में सर्वाधिक बलशाली — रांजणगाँव तीर्थ, जहाँ स्वयं शिव ने त्रिपुरासुर दैत्य का सामना करने से पूर्व गणेश का आवाहन किया।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अष्टविनायक क्या है?+

अष्टविनायक महाराष्ट्र में भगवान गणेश के आठ पवित्र, स्वयं-प्रकट धाम हैं, प्रत्येक की अपनी विशिष्ट मूर्ति और कथा है, जिनके दर्शन एक ही तीर्थयात्रा के रूप में किए जाते हैं।

अष्टविनायक मंदिर कहाँ हैं?+

आठों महाराष्ट्र में हैं, जो दक्कन के पुणे और रायगढ़ जिलों के आसपास बसे हैं।

अष्टविनायक के दर्शन किस क्रम में होते हैं?+

यात्रा परंपरागत रूप से मोरगाँव के मयूरेश्वर से आरंभ और समाप्त होती है, और एक निश्चित क्रम में आठों धामों को समेटती है।

प्रत्येक मूर्ति में क्या विशेष है?+

प्रत्येक गणेश सूँड़ के मोड़, मुद्रा और कथा में भिन्न हैं; उदाहरणतः सिद्धटेक के सिद्धिविनायक एकमात्र हैं जिनकी सूँड़ दाहिनी ओर मुड़ी है।