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गुजरात के मंदिर

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गुजरात का सौराष्ट्र तट वह भूमि है जहाँ सनातन परंपरा की दो प्राचीनतम कथाएँ समुद्र से मिलती हैं। पश्चिमी छोर पर श्रीकृष्ण की नगरी द्वारका है — चार धामों में से एक — जहाँ गोमती तट पर द्वारकाधीश मंदिर (जगत मंदिर) का शिखर ऊँचा उठता है और उस पर 52 गज की ध्वजा दिन में कई बार बदली जाती है। द्वारका से बेट द्वारका के मार्ग पर नागेश्वर ज्योतिर्लिंग है, जिन्हें समस्त विष और भय से रक्षा करने वाला माना जाता है। तट के साथ आगे प्रभास पाटण में सोमनाथ विराजमान हैं — बारह ज्योतिर्लिंगों में प्रथम, जो सदियों में कई बार टूटे और फिर-फिर बने; वर्तमान मंदिर की प्रतिष्ठा 1951 में हुई और वह भारत की सांस्कृतिक दृढ़ता का प्रतीक है।

यात्रा की दृष्टि से यह त्रिकोण अत्यंत सुगम है। नागेश्वर द्वारका से मात्र 17 किलोमीटर दूर है, और सोमनाथ तटीय राजमार्ग से लगभग 230 किलोमीटर — इसलिए द्वारका-सोमनाथ की पारंपरिक यात्रा दो-तीन दिनों में तीनों मंदिरों के दर्शन करा देती है। अधिकांश यात्री नाव से बेट द्वारका जाते हैं और कई गिर या दीव तक यात्रा बढ़ाते हैं। समुद्र की लहरों के साथ होती संध्या आरती इस तीर्थयात्रा को अविस्मरणीय बना देती है।

यह सूची अभी पूर्ण नहीं है — शोध पूरा होते ही इस राज्य के और महान मंदिर यहाँ जुड़ते जाएँगे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

MereMandir पर गुजरात के कितने प्रमुख मंदिर सूचीबद्ध हैं?+

तीन — वेरावल के पास प्रभास पाटण में सोमनाथ, द्वारका से बेट द्वारका मार्ग पर नागेश्वर, और द्वारका नगरी का द्वारकाधीश मंदिर। इस सूची में बारह ज्योतिर्लिंगों में से दो और चार धामों में से एक धाम शामिल हैं — और तीनों मंदिर सौराष्ट्र के समुद्र-तट पर स्थित हैं।

गुजरात में कौन-कौन से ज्योतिर्लिंग हैं?+

MereMandir पर गुजरात के दो ज्योतिर्लिंग हैं — सोमनाथ, जिनका नाम द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र में सबसे पहले आता है और जो सदियों में कई बार पुनर्निर्मित हुए, तथा द्वारका के पास नागेश्वर, जिन्हें समस्त विष और भय से रक्षा करने वाला माना जाता है और जहाँ शिव की लगभग 25 मीटर ऊँची प्रतिमा है।

क्या द्वारका और सोमनाथ एक ही यात्रा में हो सकते हैं?+

हाँ — यही सौराष्ट्र की पारंपरिक यात्रा है। नागेश्वर द्वारका से मात्र 17 किलोमीटर दूर बेट द्वारका मार्ग पर है, और सोमनाथ पोरबंदर होते हुए तटीय राजमार्ग से लगभग 230 किलोमीटर — चार-पाँच घंटे की ड्राइव। दो-तीन दिनों में तीनों मंदिरों के दर्शन हो जाते हैं; नाव से बेट द्वारका जाना लोकप्रिय अतिरिक्त पड़ाव है।

गुजरात के तटीय मंदिरों के दर्शन का सर्वोत्तम समय क्या है?+

अक्टूबर से मार्च — समुद्री हवा सुहावनी और आकाश साफ रहता है, द्वारका-सोमनाथ यात्रा के लिए आदर्श। द्वारकाधीश में जन्माष्टमी (अगस्त-सितंबर) तथा सोमनाथ में महाशिवरात्रि और कार्तिक पूर्णिमा सबसे बड़े उत्सव हैं, पर तब भीड़ चरम पर होती है। ग्रीष्म में तट पर गर्मी और उमस रहती है, इसलिए प्रातः दर्शन उचित है।